रांची: करमटोली से बूटी मोड़ तक करीब 8 किलोमीटर का इलाका राजधानी का सबसे महत्वपूर्ण हेल्थ कॉरिडोर माना जा सकता है। इसी रूट पर रिम्स जैसे सरकारी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल से लेकर मेडिका सहित कई बड़े अस्पताल मौजूद हैं, जहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जहां सबसे तेज रास्ता होना चाहिए, वहीं अब सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।
अस्पतालों के बीच जाम में फंस रही एम्बुलेंस
रिम्स चौक और उसके आसपास की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। सड़क के दोनों किनारों पर बेतरतीब खड़े ऑटो, ई-रिक्शा, ठेला-खोमचा और अनियमित पार्किंग के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है। हालत ऐसी कि कई बार इमरजेंसी मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस भी इस जाम में फंस जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर मरीजों के लिए “गोल्डन ऑवर” यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय जीवन बचाने में निर्णायक होता है, लेकिन रिम्स पहुंचने से पहले ही यह समय ट्रैफिक में निकल जाना चिंता बढ़ाने वाला है।
ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद रोजाना अव्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद रिम्स चौक पर रोज वही हालात दिखते हैं। ऑटो चालकों द्वारा बीच सड़क पर सवारी उठाना-उतारना, ई-रिक्शा की अव्यवस्थित कतारें और सड़क किनारे बढ़ते अस्थायी अतिक्रमण जाम को और गंभीर बना रहे हैं।
VIP रूट नहीं, इसलिए क्या कम है चिंता?
बूटी मोड़ से करमटोली मार्ग पर बड़े अस्पतालों की संख्या अधिक होने के बावजूद यह इलाका अक्सर प्रशासनिक प्राथमिकता में पीछे नजर आता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चूंकि यह क्षेत्र नियमित VIP मूवमेंट का मुख्य केंद्र नहीं है, इसलिए यहां ट्रैफिक सुधार को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखती।
रोज की परेशानी, सिर्फ एक दिन की समस्या नहीं
यह समस्या किसी त्योहार या विशेष दिन तक सीमित नहीं, बल्कि रोजाना की चुनौती बन चुकी है। मरीज, परिजन, डॉक्टर, स्टाफ और आम लोग घंटों जाम से जूझते हैं।
क्या हो सकते हैं समाधान?
रिम्स चौक और अस्पताल क्षेत्र के आसपास नो-पार्किंग का सख्त पालन
ऑटो और ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड
सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई
एम्बुलेंस ग्रीन कॉरिडोर व्यवस्था
अस्पताल जोन को विशेष ट्रैफिक संवेदनशील क्षेत्र घोषित करना
सवाल सिर्फ ट्रैफिक का नहीं, जिंदगी का है
रांची के सबसे संवेदनशील मेडिकल रूट पर अगर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, तो यह केवल यातायात समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन रिम्स चौक और इस पूरे अस्पताल कॉरिडोर को सिर्फ एक और व्यस्त सड़क मानता रहेगा, या इसे जिंदगी बचाने वाले मार्ग की तरह प्राथमिकता देगा?

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