झारखंड समेत देशभर में फर्जी लोन ऐप का जाल तेजी से फैल रहा है। “दो मिनट में लोन”, “नो CIBIL चेक”, “इंस्टेंट अप्रूवल” जैसे लालच देकर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। हाल के मामलों में सामने आया है कि छोटी रकम का लोन लेकर लोग बड़े मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।
कैसे काम करता है यह खेल?
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरा भुगतान करने के बाद भी ऐप में “Due” दिखाया जाता है और तथाकथित रिकवरी एजेंट दोबारा पैसे मांगने लगते हैं।
धमकी और ब्लैकमेल का हथकंडा
जब पीड़ित दोबारा भुगतान से इनकार करता है तो शुरू होता है मानसिक दबाव:
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फोटो को एडिट कर अश्लील बनाकर वायरल करने की धमकी
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व्हाट्सएप कॉन्टैक्ट लिस्ट पर मैसेज भेजने की चेतावनी
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परिवार और रिश्तेदारों को कॉल करने की बात
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गाली-गलौज और डराने वाले कॉल
विशेषज्ञों का कहना है कि यह साफ तौर पर साइबर ब्लैकमेल और उगाही (Extortion) की श्रेणी में आता है।
कानूनी स्थिति क्या है?
कानून के जानकार बताते हैं:
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किसी की फोटो एडिट कर बदनाम करना आईटी एक्ट के तहत अपराध है।
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धमकी देकर पैसे मांगना दंडनीय अपराध है।
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बिना RBI पंजीकरण के लोन संचालन अवैध माना जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन और आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल उपलब्ध है।
Reserve Bank of India (RBI) ने:
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गैर-पंजीकृत (Unregistered) लोन ऐप्स पर सख्ती बढ़ाई
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डिजिटल लेंडिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की
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NBFC/बैंक को जिम्मेदार बनाया कि वे केवल अधिकृत ऐप्स से ही लोन दें
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प्रोसेसिंग फीस और ब्याज की पूरी जानकारी पहले दिखाना अनिवार्य किया
कैसे पहचानें फर्जी लोन ऐप?
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प्रोसेसिंग फीस पहले ही काट ली जाती है
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पर्सनल UPI आईडी पर भुगतान मांगा जाता है
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ऐप कॉन्टैक्ट, गैलरी और एसएमएस की अनुमति मांगता है
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कोई वैध एग्रीमेंट या आधिकारिक ईमेल नहीं होता
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भुगतान के बाद भी “ड्यू” दिखता रहता है
कानूनी बैंक या NBFC कभी भी अश्लील फोटो वायरल करने जैसी धमकी नहीं देता।
क्यों फंस जाते हैं लोग?
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आर्थिक तंगी
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कम CIBIL स्कोर
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तुरंत पैसे की जरूरत
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बैंक से लोन रिजेक्ट होना
इन्हीं मजबूरियों का फायदा उठाकर ये ऐप लोगों को फंसाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
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दोबारा भुगतान न करें
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सभी स्क्रीनशॉट और UTR सुरक्षित रखें
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ऐप की अनुमति हटाकर तुरंत अनइंस्टॉल करें
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साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
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अनजान नंबर ब्लॉक करें
निष्कर्ष
डिजिटल दौर में लोन लेना आसान हुआ है, लेकिन खतरे भी उतने ही बढ़े हैं। “इंस्टेंट लोन” के नाम पर चल रहे कई ऐप असल में ब्लैकमेल और ठगी का नेटवर्क साबित हो रहे हैं। जागरूकता और समय पर शिकायत ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।

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