रांची। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) तक पहुंचने के लिए रिंग रोड से करीब 3 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। यह इलाका बड़े हिस्से में ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है। दिन में यह रास्ता सामान्य नजर आता है, लेकिन शाम होते ही तस्वीर बदल जाती है। सड़क के बड़े हिस्से में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने और सार्वजनिक परिवहन की आवाजाही कम हो जाने से पूरा इलाका काफी सुनसान हो जाता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठता है। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कई छात्र-छात्राएं बाहरी क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से आते हैं। उनके लिए विश्वविद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा।
अंधेरे का फायदा उठाते हैं असामाजिक तत्व?
स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आती रही है कि सुनसान और अंधेरे रास्ते पर कभी-कभी कुछ युवक अपने वाहनों को खड़ा कर तेज आवाज में संगीत बजाते हैं। आरोप है कि कुछ लोग सड़क पर खड़े होकर नशा भी करते हैं और वाहनों की हाई-बीम लाइट का इस्तेमाल कर वहां से गुजरने वाले लोगों, खासकर छात्र-छात्राओं को परेशान करते हैं।
ऐसी गतिविधियों की वास्तविकता और स्थिति की पुलिस द्वारा जांच जरूरी है। हालांकि, अगर ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो उस इलाके में नियमित पुलिस गश्त और निगरानी की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस पेट्रोलिंग कितनी जरूरी?
रिंग रोड से विश्वविद्यालय तक का यह मार्ग शाम के समय अपेक्षाकृत सुनसान हो जाता है। ऐसे संवेदनशील और कम आबादी वाले मार्ग पर पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग, विशेषकर शाम से रात के समय, सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
सवाल यह है कि इस रास्ते पर पुलिस की नियमित गश्त कितनी होती है? क्या संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है? और क्या स्थानीय पुलिस को छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों की जानकारी है?
इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस प्रशासन से मिलना चाहिए।
सालों बाद भी स्ट्रीट लाइट क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल सड़क की बुनियादी सुविधा को लेकर है। यदि वर्षों से इस मार्ग से छात्र-छात्राओं और विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का आवागमन हो रहा है, तो अब तक करीब 3 किलोमीटर के इस रास्ते पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट क्यों नहीं लगाई गई?
CUJ की भी बनती है जिम्मेदारी
सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल प्रशासन या पुलिस पर डाल देना भी उचित नहीं होगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड को भी अपने विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर सक्रिय पहल करनी चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, शाम के समय परिवहन व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी जैसे मुद्दों को उठा सकता है।
जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर सकता है और प्रशासन के सामने ठोस प्रस्ताव रख सकता है।
बाहर से आने वाले छात्रों के लिए भी यह महत्वपूर्ण संदेश
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में झारखंड के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं। विश्वविद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता अगर शाम के बाद अंधेरे और असुरक्षा की स्थिति में दिखाई देता है, तो इसका असर केवल छात्रों की परेशानी तक सीमित नहीं रहता।
यह शहर, राज्य और प्रशासन की छवि से भी जुड़ जाता है।
झारखंड में शिक्षा के लिए बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देना केवल विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की साझा जिम्मेदारी है।
अब सवाल जवाब का है
CUJ से जुड़े इस मार्ग को लेकर अब प्रशासन, पुलिस और विश्वविद्यालय—तीनों से कुछ सीधे सवाल पूछे जाने चाहिए:
• रिंग रोड से CUJ तक स्ट्रीट लाइट कब लगेगी?
• शाम और रात के समय इस मार्ग पर पुलिस पेट्रोलिंग की क्या व्यवस्था है?
• सुनसान इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी कैसे की जा रही है?
• छात्रों के लिए शाम के बाद सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था क्यों नहीं बढ़ाई जा रही?
• क्या CUJ प्रशासन ने इस समस्या को संबंधित विभाग के सामने आधिकारिक रूप से उठाया है?
इन सवालों का समाधान जरूरी है, क्योंकि विश्वविद्यालय तक पहुंचने का रास्ता भी विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था का ही हिस्सा है।

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